वैराग्य और माहात्म्य सहित भक्ति का समन्वयरूप एकान्तिक धर्म है । उनका श्रेष्ठ अनुसंधान इन बातों में सतत रहा है एकान्तिक धर्म के अंगो की प्रसंगोपात बातों में स्वामीश्रीने स्पष्ट रूप में बहुत बातें को तोड-फोडके अलमस्त रूप से कह भी दी है और इन में इष्टदेव भगवान श्रीस्वामिनारायणकी सर्वोच्च उपासना तथा सत्संग की विशुद्धि के लिए उनका सदाग्रह कभी तो पुण्य प्रकोप के स्वरूप में दीख पडता है ।
સ્વામી બાલમુકુંદદાસજી
તેઓ ઈષ્ટદેવ શ્રીહરિના અનન્ય ઉપાસક એકાંતિક સંત હતા
જનહિત માટે ઉપયોગી સગ્રંથનું પ્રથમ પ્રકાશન અમારા ગુ શાસ્ત્રી શ્રી ધર્મજીવનદાસજી સ્વામીએ સને ૧૯૫૪માં રાજકોટ ગુકુલ પ્રેસમાં કરાવેલું
Paramhans Gatha Part - 2 Books वैराग्य और माहात्म्य सहित भक्ति, : : : ( 3 12 315) : . () . () . ( ) . . . . . , , . . , , , , . . . , . . . , , . . , , , , , . . : . . . . , , , , , . . :: . . . 2 . .. . .